Tuesday, April 16, 2024
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कौन सी सत्ताधारी ताकतें शराब माफिया को बचा रहीं हैं-?: राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी ने ज़हरीली शराब कांड की जांच हाईकोर्ट के जज से कराने को कहा

नई दिल्ली (क़ौमी आगाज़ ब्यूरो)
गुजरात राज्य में जहाँ शराब पर परिबंध है वहां हाल ही में ज़हरीली शराब पीने से हुई मौतों के मुद्दे पर भाजपा घिरती नज़र आ रही है। कांग्रेस पार्टी ने मांग की है कि इस मामले की जांच गुजरात हाईकोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए। पार्टी के मीडिया और प्रचार प्रमुख पवन खेड़ा ने यह आरोप भी लगाया कि गुजरात में भाजपा सरकार के संरक्षण में नशे का कारोबार हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘तथाकथित शराबबंदी वाले गुजरात में जहरीली शराब पीने की वजह से 45 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और 100 से ज्यादा लोग जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।’’ खेड़ा ने कहा, ‘‘यह जानकारी सामने आई है कि बोटाद जिले में 600 लीटर ‘मिथाइल अल्कोहल’ (मेथेनॉल) अहमदाबाद से लाया गया था। उसके बाद इसमें पानी मिलाकर जिले के विभिन्न इलाकों में बेच दिया गया जिसके सेवन से या तो लोगों की जान चली गई या उनके गुर्दे खराब हो गए। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात में ज़हरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत होने पर दुख जताते हुए सवाल किया कि राज्य में कौन सी सत्ताधारी ताकतें हैं जो शराब माफिया को संरक्षण दे रही हैं? उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘ड्राई स्टेट’ गुजरात में ज़हरीली शराब पीने से कई घर उजड़ गए। वहां लगातार अरबों रुपये के मादक पदार्थ भी बरामद हो रहे हैं। यह बेहद चिंता की बात है। बापू और सरदार पटेल की धरती पर, ये कौन लोग हैं जो धड़ल्ले से नशे का कारोबार कर रहे हैं? इन माफिया को कौन सी सत्ताधारी ताक़तें संरक्षण दे रही हैं-? पवन खेड़ा ने कहा है कि एक ड्राई स्टेट में इतना सब कुछ हो जाए और स्थानीय पुलिस-प्रशासन को भनक तक नहीं लगे, यह संभव नहीं है। जरूर इसके पीछे सत्ताधारी दल के नेता, पुलिस-प्रशासन और शराब माफियाओं की मिलीभगत रही होगी। यह सिर्फ आरोप नहीं है बल्कि इसके पीछे ठोस आधार भी है। रोजीद गांव के सरपंच लगातार प्रशासन को पत्र लिख कर बता रहे थे कि गांव में सरेआम देसी शराब की बिक्री हो रही है।’’
उन्होंने दावा किया, कि ज़हरीली शराब से जिन लोगों की मौत हुई है उनके परिजनों का मीडिया में रोते हुए बयान है कि यहां कोई शराबबंदी नहीं है, खुलेआम शराब बिक रही है। यदि पूरे गुजरात की बात करें तो अवैध शराब का करीब 15,000 करोड़ रुपए का सालाना कारोबार हो रहा है। पवन खेड़ा ने कहा कि इतना बड़ा मामला हुआ, करीब 50 लोगों की जान गई, 100 से ज्यादा लोग जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं लेकिन न तो गृह मंत्री, न मुख्यमंत्री और न ही प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिवारों से मुलाक़ात की। उन्होंने मांग उठाते हुए कहा कि ज़हरीली शराब कांड की उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश से जांच कराई जानी चाहिए क्योंकि जिस पुलिस पर आरोप है यदि वही जांच करेगी तो जांच का कोई अर्थ नहीं है कि इस मामले में गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने बुधवार को कहा था कि 25 जुलाई को प्रदेश के बोटाद में जहरीली शराब पीने के बाद बोटाद और पड़ोसी अहमदाबाद जिले में अब तक 42 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि भावनगर, बोटाद और अहमदाबाद में कम से कम 97 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं।

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